बांका, जनवरी 10 -- बांका, निज संवाददाता। बांका जिला प्रकृति की गोद में बसा वह क्षेत्र रहा है, जहां नदियां केवल जलधाराएं नहीं बल्कि जीवन की धड़कन हुआ करती थीं। ओढ़नी, चांदन, बदुआ, सुखिनयां, चीर आदि नदियों की अविरल धारा कभी बांका के किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों और पड़ोसी राज्य झारखंड के कई जिलों के किसानों के लिए भी वरदान साबित होती थी। इन नदियों में सालों भर पानी रहता था। खेतों की सिंचाई, पशुपालन, मछली पालन और घरेलू जरूरतों के लिए लोग इन्हीं पर निर्भर थे। लेकिन समय के साथ यह जीवनदायिनी नदियां आज खुद जीवन के लिए संघर्ष करती नजर आ रही हैं। आज स्थिति यह है कि बरसात के कुछ महीनों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश नदियां सूखी, सिकुड़ी और प्यासी दिखाई देती हैं। कभी जिन तटों पर हरियाली लहलहाती थी, वहां अब रेत, झाड़ियां और सूखी मिट्टी दि...
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