बहराइच, फरवरी 3 -- बहराइच, संवाददाता। कुपोषण सिर्फ कमजोरी नहीं बल्कि बच्चों के शरीर, दिमाग और भविष्य को प्रभावित करने वाली गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। कई परिवार इसे बीमारी या खतरे की स्थिति नहीं समझते और सोचते हैं कि बच्चा समय के साथ अपने-आप ठीक हो जाएगा। यही सोच कई बार बच्चों को अति कुपोषण की ओर धकेल देती है। यदि समय रहते इलाज मिले तो मासूमों की मुस्कान लौट सकती है। डीएचईआईओ बृजेश सिंह के अनुसार अति कुपोषित (सैम) बच्चों के इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में 10 बेड का पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित है। लेकिन सामाजिक झिझक और परिवारों की असहमति के कारण कई जरूरतमंद बच्चे समय पर एनआरसी नहीं पहुंच पाते। बताया कि अक्टूबर से दिसंबर तक 2298 बच्चों की स्क्रीनिंग में 844 बच्चे कुपोषित पाए गए। इनमें 821 स्थानीय स्तर पर इलाज योग्य थे, लेकिन केवल 570 ने उपचार ...