धनबाद, फरवरी 19 -- बलियापुर, प्रतिनिधि। करमाटांड़ में चल रहे पांच दिवसीय श्रीश्री 108 रामचरितमानस ज्ञानयज्ञ के तीसरे दिन मंगलवार को कथावाचिका आकृति तिवारी ने कहा कि अभिमान मनुष्य के कर्म को नष्ट करता है। इसिलिए अभिमान का त्याग करो। प्रभु हमें धर्म के रास्ते पर चलना सिखाते हैं। अधर्म का त्याग करो। भगवान का दिया हुआ मनुष्य का यह शरीर एक ड्राइवर के समान है, जो अपने वाहन में करोड़ों रुपए की संपत्ति लेकर चलता है, पर उसकी पगार मात्र दस हजार है। संसार एक सुंदर मायानगरी है। प्रकृति मां का रूप है। इसलिए जीवनकाल में कम-से-कम पांच पौधे जरूर लगाऐं। वृक्षों का न काटें। यह हमें ऑक्सीजन देता है। कथा प्रारंभ होते ही श्रोताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। कार्यक्रम को लेकर आसपास का माहौल भक्तिमय बन गया है।
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