बलरामपुर, फरवरी 21 -- गैड़ास बुजुर्ग, संवाददाता। रमजान-ए-पाक का मुकद्दस महीना शुरू होते ही मस्जिदों में नमाज, तिलावत और दुआओं का सिलसिला तेज हो गया है। चांद के दीदार के साथ ही मुसलमानों ने रोजा और इबादत का संकल्प लिया। क्षेत्र के मौलाना रिजवान अहमद जियाई ने बताया कि इस्लाम में पांच वक्त की नमाज हर बालिग मुसलमान चाहे मर्द हो या औरत सभी पर फर्ज है। कुरआन व हदीस के मुताबिक रमजान के रोजे भी हर सक्षम बालिग पर अनिवार्य हैं। हालांकि बीमार, अत्यधिक वृद्ध या असमर्थ लोगों को निर्धारित शर्तों के साथ रोजा रखने में छूट दी गई है। मौलाना ने कहा कि रमजान रहमत, मगफिरत और बरकत का महीना है। इस दौरान की गई इबादतों का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। दिन में रोजा और रात में नमाज से बंदा अल्लाह की खास रहमत का हकदार बनता है। तरावीह की नमाज को इस्लाम में सुन्नत-ए-मुअक्...
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