हजारीबाग, दिसम्बर 9 -- बरकट्ठा प्रतिनिधि। हौसला बुलंद, इरादा पक्का और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो दिव्यांगता आड़े नही आता। बल्कि उड़ने की शक्ति मिल जाती है। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है बरकट्ठा का दिव्यांग युवक संदीप कुमार दास ने। संदीप कुमार दास दोनों पैर, और हाथ से दिव्यांग होने के बावजूद उसने गरीबी और लाचारी के जंजीर को तोड़कर उसने सफलता को कामयाबी में बदल दिया। वह श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बनकर माता पिता व क्षेत्र का नाम रौशन किया है। उसके पिता अर्जुन रविदास पेशे से राज मिस्त्री हैं। जीवन में हर कठिनाई को झेलते हुए इस मुकाम हासिल किया है। गरीबी, लाचारी से संदीप कभी टूटे नहीं गिरे, संभले, फिर उठे, और मुकाम हासिल किया। संदीप ने जेएसएससी सीजीएल में श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी बनकर बता दिया कि सपनों पर विश्वास और मेहनत से कोई भी मंज़िल दूर नहीं। लेकिन किस्मत ...
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