बदायूं, जून 22 -- उर्दू अदब के उस्ताद शायर ख़ालिद नदीम बदायूंनी के निधन पर श्रद्धाजंलि गोष्ठी का आयोजन सादिक अलापुरी के आवास पर किया गया। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अशोक खुराना ने की। वक्ताओं ने कहा कि ख़ालिद नदीम बदायूंनी की शायरी केवल साहित्य नहीं, बल्कि तहज़ीब, इंसानियत और अदबी ज़मीर की ज़िंदा दस्तावेज़ है, जो आने वाली नस्लों को रोशनी और रास्ता देती रहेगी। साहित्यकार अशोक खुराना ने खालिद नदीम को श्रद्धांजलि देते हुए कहा- खालिद की साहित्य में, बनी अलग पहचान, आज बदायूं का हुआ, बहुत बड़ा नुकसान...।अरशद रसूल बदायूंनी ने पढ़ा, रिश्ता मुहब्बतों का निभा कर चला गया...। समर बदायूंनी ने कहा, भरोसा कीजिए क्या ज़िंदगी का,यह कब सो जाए पहलू में कजा के...। वरिष्ठ शायर डॉ. सोहराब ककरालवी ने कहा कि ख़ालिद नदीम ने उर्दू शायरी को आम जनमानस से जोड़ा और य...