गोरखपुर, फरवरी 24 -- गोरखपुर। जिले की 67 वर्षीय महिला को गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस की बीमारी थी। उन्हें सांस फूलने की समस्या, अत्यधिक थकान, बार-बार झपकी आने और हाल ही में बेहोश होने की शिकायत थी। मैक्स सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल लखनऊ में उसे लेकर परिजन पहुंचे, जहां उसकी 27 दिन पहले इसका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद उसे चार दिन भर्ती होना पड़ा था। अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक वैस्कुलर सर्जन डॉ. विजयंत देवेनराज ने बताया कि कैल्शियम जमने और वाल्व की पत्तियों के मोटा होने के कारण दिल के एओर्टिक वॉल्व का मुंह संकरा हो जाता है, जिससे दिल से शरीर की ओर खून के बहाव में रुकावट होती है। हृदय के एओर्टिक वाल्व सिकुड़ जाता है। टैवी में क्षतिग्रस्त हृदय वॉल्व को पैर की नस के माध्यम से एक पतली नली डालकर बदला जाता है, जिससे ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं ...
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