नई दिल्ली, नवम्बर 6 -- सुबह के आठ बजते ही परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की चहक और मासूम हंसी गूंज उठती है। कहीं प्रार्थना की ध्वनि, तो कहीं बच्चों की गुड मॉर्निंग, सर की सामूहिक पुकार वातावरण में गूंजती है, लेकिन इस खुशनुमा माहौल के बीच प्रधानाध्यापक और शिक्षक मोबाइल स्क्रीन में उलझे रहते हैं। कोई प्रेरणा ऐप न खुलने से परेशान है, तो कोई निपुण लक्ष्य ऐप पर छात्रों की प्रगति रिपोर्ट भरने में जूझ रहा है। कभी नेटवर्क कमजोर पड़ता है, तो कभी डेटा अपलोड अधूरा रह जाता है। डिजिटल युग की यह तस्वीर अब शिक्षण व्यवस्था की नई हकीकत बन चुकी है, जहां बच्चों के बीच खड़ा शिक्षक अब किताबों से ज्यादा ऐप्स में व्यस्त दिखाई देता है। शिक्षकों का कहना है कि उनके फोन में अब तक 40 से अधिक ऐप इंस्टॉल हैं। निपुण लक्ष्य, प्रेरणा, दीक्षा, कर्मयोगी भारत, पीएफएमएस, ई-कव...
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