वाराणसी, नवम्बर 16 -- वाराणसी। प्रेमचंद का बच्चों के प्रति विचार था कि उन्हें बचपन से ही नैतिक मूल्यों, संवेदनशीलता और आत्मविश्वास जैसे मूल्यों की शिक्षा दी जानी चाहिए। उनका मानना था कि बच्चों की स्वाभाविक जिज्ञासा को दबाने के बजाय, उसे बढ़ावा देना चाहिए। कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जन्मस्थली लमही में प्रेमचंद मार्गदर्शन केंद्र ट्रस्ट की ओर से आयोजित 'सुनो मैं प्रेमचंद' कार्यक्रम के 1735 दिवस पर साहित्यकार प्रो. श्रद्धानंद ने ये बातें कहीं। कार्यक्रम में प्रेमचंद की कहानी 'नादान दोस्त व पागल हाथी' का पाठन दो बाल कलाकार संस्कृति पांडेय और अभिनव कुशवाहा ने किया। ट्रस्ट के संरक्षक प्रो. श्रद्धानंद, निदेशक राजीव गोंड, रामजतन पाल ने इनका सम्मान किया। कार्यक्रम में व्यंग्यकार सूर्यदीप, सुरेश चंद्र दुबे, अशोक पांडेय, कनकलता पांडेय, ललिता यादव, ...
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