नई दिल्ली, जून 12 -- पेरेंटिंग का मतलब सिर्फ बच्चों पर कंट्रोल करना या हर वक्त उन्हें प्रोटेक्ट करते रहना ही नहीं है बल्कि धीरे-धीरे बच्चों को आजाद छोड़ना भी है। यहां इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि समय के साथ पैरेंट्स बच्चों पर अपना हक जताना ही छोड़ दें। लेकिन जैसे-जैसे बच्चे की उम्र बढ़े, पैरेंट्स को अपने व्यवहार और पेरेंटिंग के तरीके में कुछ बदलाव जरूर लाने चाहिए। बच्चा छोटा होता है तो पैरेंट्स उसके लिए हर फैसले लेते हैं, उसे हर कदम पर प्रोटेक्ट करते हुए चलते हैं। लेकिन यही सेम बर्ताव अगर आप बच्चे के बड़े होने पर भी करते रहेंगे तो ये ओवरकंट्रोलिंग और ओवरप्रोटेक्टिव बिहेवियर आपके रिश्तों में दूरियों की वजह भी बन सकता है। इसलिए जरूरी है कि नए जमाने के साथ खुद को एडॉप्ट किया जाए और ये काम बच्चों के साथ बिल्कुल ना किए जाएं।हर बात में ना...
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