मेरठ, दिसम्बर 16 -- लोक और शास्त्रीय संगीत की आत्मा को तकनीक कभी पूरी तरह नहीं समझ सकती। एआई चाहे जितनी उन्नत हो जाए, वह गुरु-शिष्य परंपरा के भाव, घुंघरुओं की खनक और सुरों के जीवंत तालमेल को नहीं गढ़ सकती। संगीत और नृत्य में जो अनुभूति, तप और साधना है, वह केवल मन, अभ्यास और समर्पण से ही संभव है। यह विचार प्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने व्यक्त किए। वह सोमवार को शिवांगी संगीत महाविद्यालय की शास्त्रीनगर स्थित नई शाखा के शुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचीं। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए संगीत, कला और जीवन मूल्यों पर प्रेरक विचार साझा किए। मालिनी अवस्थी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब शास्त्रीय संगीत के प्रति युवाओं की रुचि कम हो गई थी, लेकिन अब इसका दायरा फिर बढ़ता दिख रहा है। आज के दौर में संगीत केवल कला नहीं, बल्कि ...