नई दिल्ली, फरवरी 1 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें निजी अस्पताल को एक अविवाहित मृत व्यक्ति के 'फ्रीज' किए गए शुक्राणु उसके माता-पिता को सौंपने का निर्देश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने मृतक के माता-पिता को नोटिस जारी किया और सुनवाई 27 फरवरी तक टाल दी। केंद्र की तरफ से पेश वकील ने कहा कि एकल न्यायाधीश का निर्णय मौजूदा सरोगेसी और सहायक प्रजनन कानून के विपरीत है, क्योंकि कानून दादा-दादी को इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) और सरोगेसी के लिए इच्छुक दंपति बनने की अनुमति नहीं देता। उन्होंने अदालत को बताया कि आदेश के बावजूद शुक्राणु अब तक माता-पिता को नहीं सौंपा गया है। मामले की पृष्ठभ...