मैनपुरी, मार्च 18 -- अपर सत्र न्यायाधीश इंदिरा सिंह ने दिहुली कांड का फैसला सुनाने के बाद कलम तोड़ दी। उन्होंने इस घटना को विरल से विरलतम करार दिया। फैसले में लिखा कि भले ही अभियोजन ने हत्यारों का आपराधिक इतिहास पेश नहीं किया लेकिन जिस तरीके से इस घटना को अंजाम दिया गया वह बेहद क्रूरतम था। हत्यारों को फांसी की सजा से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलेगा। न्यायाधीश इंदिरा सिंह ने दिहुली कांड में दोषसिद्ध घोषित किए गए रामसेवक तथा कप्तान सिंह को धारा 148 में तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई और धारा 302 में फांसी की सजा सुनाकर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने रामसेवक, कप्तान और रामपाल द्वारा किए गए इस अपराध व कृत्य को विरल से विरलतम करार दिया और कहा कि ये तीनों अपराधी कठोरतम दंड के अधिकारी हैं। हत्यारों को सजा दिलाने में प्रभावी पै...
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