आजमगढ़, दिसम्बर 10 -- आजमगढ़, संवाददाता। कोयलसा ब्लाक सभागार में बुधवार को इन सीटू फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के अंतर्गत किसानों को प्रशिक्षित किया गया। इस दौरान कृषि विज्ञान केंद्र लेदौरा के वैज्ञानिकों ने किसानों को जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि किसान फसल अवशेष पर आधा किलोग्राम विस्वा की दर से यूरिया का छिड़काव कर दें। इससे पराली खेत में गलकर खाद में बदल जाएगी। केवीके के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. एलसी वर्मा ने बताया कि किसान पराली को खेत में मिलाएं। खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाएं। पराली में बिल्कुल भी आग न लगाएं। इससे पर्यावरण प्रदूषित होता है एवं आवश्यक पोषकतत्वों का नुकसान होता है। मत्स्य वैज्ञानिक आदित्य कुमार ने बताया कि एक टन पराली को खेत में मिलाने पर 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन, 2.3 किलोग्राम फास्फोरस, 25 किलोग्राम पोटाश, 1....
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