नई दिल्ली, मई 1 -- प्राचीन समय में कान छिदवाने को लेकर लड़का-लड़की में कोई भेद नहीं किया जाता था। ऐसा ना सिर्फ धार्मिक कारणों की वजह से बल्कि सेहत के लिहाज से भी यह कई मायनों में जरूरी माना गया था। शास्त्रों के अनुसार, कर्णवेध संस्कार, सोलह संस्कारों में से नौवां संस्कार है, जो बच्चे के जन्म के 6 महीने के बाद करवाया जाता है। पहले के समय में जिन लड़कों के कान नहीं छिदे होते थे, उन्हें अंतिम संस्कार नहीं करने दिया जाता था। जबकि आयुर्वेद इस परंपरा को स्वास्थ्य से जोड़कर देखता है। आयुर्वेद के अनुसार यह प्रक्रिया शरीर के कुछ एक्यूप्रेशर बिंदुओं को प्रभावित करके पुरुषों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बना सकती है। आइए जानते हैं कैसे ईयर पियर्सिंग पुरुषों के लिए सिर्फ फैशन स्टेटमेंट ही नहीं बल्कि सेहत से जुड़े कई फायदे लेने का भी एक तरीका...
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