उन्नाव, फरवरी 4 -- उन्नाव। शासन से कैसे भी नियम तय हो लेकिन राजस्व महकमा अपने नियम खुद तय करता है। शासन से दाखिल खारिज के लिए बनाए गए नियमों पर तो पूरी तरह से जिम्मेदारों की स्वेच्छाचारिता हावी है। वैसे चाहे दाखिल खारिज कामर्शियल, आवासीय भूमि का हो या फिर कृषि जमीन का। जिम्मेदारों की मनमानी सबमें बनी है लेकिन कृषि भूमि के दाखिल खारिज में यह मनमानी किसानों के लिए सबसे ज्यादा परेशानी बनी है। सदर तहसील में कृषि जमीनों के दाखिल खारिज में मौजूदा समय में को नियम कानून लागू नहीं है। न ही इस तरह की हो रही निरंकुशता पर उच्चाधिकारी कोई सुध ले रहे हे। सदर तहसील में वैसे तो और भी काम अफसर व अन्य जिम्मेदारों की मनमानी और अनदेखी से प्रभावित है लेकिन इस समय सबसे ज्यादा किसानों के दाखिल खारिज में बरती जा रही लापरवाही से किसानों के सब्र का बांध टूट रहा है...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.