नई दिल्ली, फरवरी 16 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बिना इजाजत ड्यूटी से गैरहाजिर रहने को सही ठहराने के लिए नकली मेडिकल सर्टिफिकेट लगाना सीरियस मिसकंडक्ट है, जिसके लिए नौकरी से भी निकाला जा सकता है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस अमित महाजन की डिवीजन बेंच ने अपने फैसले में कैट के आदेश को रद्द करते हुए इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट के एक क्लर्क को नौकरी से निकालने को सही ठहराया।बेंच ने कहा कि उचित संदेह से परे सबूत का आपराधिक मानक विभागीय कार्रवाई में लागू नहीं होता।टीबी की बीमारी का दावा कर लगाए थे फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रतिवादी इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स डिपार्टमेंट का पुराना कर्मचारी था, जो 1991 में चपरासी के तौर पर भर्ती हुआ था। उसे बाद में क्लर्क के पद पर प्रमोट कर दिया...
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