कौशाम्बी, जून 22 -- फरशे अजा बिछाओ तो आएंगी फातिमा, कच्चे मकां को खुल्द बनाएंगी फातिमा, देखेंगी जिस मकान में फरशे गमे हुसैन, उस घर को हर बला से बचाएंगी फातिमा। जब इन मिसरे को इस्तेकबाले अजा की पहली मजलिस में पेशख्वानी करते हुए रौशन करारवी ने पढ़ा तो हर आंख इमाम हुसैन को याद कर नम हो गई। कार्यक्रम की शुरुआत कुरान ए पाक की तेलावत से की गई। उसके बाद अफरोज हैदर ने सोज पढ़ी। शनिवार को माहे मोहर्रम के इस्तेकबाल को लेकर मंझनपुर के चकनगर स्थित सगीर मेंहदी रिजवी के अजाखाने में इस्तेकबाल ए अजा के नाम से पांच दिवसीय मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस की शुरुआत तेलावत ए कुरान पाक से अहमर रजा ने किया। मौलाना सैयद जमीर हैदर रिजवी ने मजलिस को खेताब करते हुए कहा कि ए लोगों माहे अजा यानी मोहर्रम आ रहा है। हमें इसका इस्तेकबाल करना है और हमारी जिम्मेदारी भी है कि...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.