भभुआ, दिसम्बर 18 -- नंगे पांव और तन पर आधे कपड़े में दिखे बच्चे, प्लास्टिक की झोपड़ी में करते हैं गुजारा मां के साथ धान की बाली, सूखी लकड़ी चुनकर लाते हैं बच्चे तब जलता है चूल्हा (पेज चार की फ्लायर खबर) भभुआ, कार्यालय संवाददाता। शहर का सेवरी नगर। गुरुवार की सुबह 6:20 बजे हैं। आसमान में कुहासा की चादर तनी है। ओस की बूंदे चेहरे पर पड़ रही है। सड़कें भींग गई हैं। सुवरा नहर के तट पर बसे इस बस्ती में प्रवेश करते ही 72 वर्षीय सुन्दर मुसहर से मुलाकात हुई। वह अलाव से अपने शरीर को गर्म कर रहा था। उसके साथ उसकी 68 वर्षीया पैर से दिव्यांग पत्नी कबूतरी देवी, रजिन्दर मुसहर और कई छोटे-छोटे बच्चे भी आग के पास बैठे थे। रजिन्दर कुर्ता और लुंगी की बदौलत ठंड से लड़ते दिखा। पूछने पर उसने कहा, कहां से गर्म कपड़े लाएं। पत्नी पैर से दिव्यांग है। उसके शरीर की हड्डी अब ...