रांची, जुलाई 31 -- रांची, वरीय संवाददाता। केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड में गुरुवार को मुंशी प्रेमचंद जयंती सह हिन्दी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कुलपति प्रो क्षिति भूषण दास ने कहा कि क्रिएटिव इकॉनमी के दौर में प्रेमचंद को नए कलेवर में नई पीढ़ी के साथ जोड़ा जा सकता है। आजकल कंटेंट क्रिएटर्स और इन्फ्लूएंसर्स अपनी अनूठे कहानी कहने के अंदाज से लाखों-करोड़ों लोगों के बीच देश दुनिया की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उसी प्रकार हमारी वृहद भारतीय ज्ञान परंपरा को भी वे लोगों तक पहुंचा सकते हैं। प्रेमचंद हमारी ज्ञान परंपरा के महान साहित्यकार और उपन्यास सम्राट हैं उनकी सामाजिक सरोकार की कहानियां आज भी प्रासंगिक हैं। इन्हीं प्रासंगिक कहानियों को एक नए कलेवर में आज की पीढ़ी के साथ जोड़कर प्रस्तुत कर रोजगार का सृजन भी किया जा सकता है। मौके पर प्रो...
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