नवादा, जनवरी 20 -- नवादा। राजेश मंझवेकर नवादा जिला जो कभी सूखे और पलायन के लिए जाना जाता था, आज यहां के युवा खेतों में एक नई इबारत लिख रहे हैं। नवादा के युवा अब हल और बैल वाली पारंपरिक खेती के ढर्रे को तोड़ रहे हैं। जिले के विभिन्न प्रखंडों के खेतों में अब सिर्फ धान और गेहूं की खुशबू नहीं, बल्कि गैर-परम्परागत खेती शिखर पर है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इन युवाओं का कोई औपचारिक कृषि प्रशिक्षण नहीं है लेकिन उन्होंने आधुनिक द्रोणाचार्य साबित हो रहे यूट्यूब आदि का सहारा लेकर खुद को प्रेरित किया और फिर अपनी धुन तथा लगन के कारण प्रायोगिक खेती में एक नया मुकाम बना रहे हैं। परंपरा से हटकर बनायी नई राह नवादा की एक छोटी सी पंचायत समाय के सकुलाचक निवासी प्रगतिशील किसान सह शिक्षक विनय प्रभाकर की कहानी जिले के कई युवाओं की प्रतिनिधि कहानी है। विनय प्रभा...
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