नई दिल्ली, नवम्बर 11 -- यदि किसी का पिता किसी ऊंचे पद पर हो, तो उस बच्चे की बोलचाल में, बातचीत के ढंग में पिता का प्रभाव आएगा। ऐसे बच्चे को अपने पिता पर अभिमान होता है। उतने ही मान से अगर हम ईश्वर को मां-बाप जानते होते, तो हमारे अंदर भी यह गर्व होता कि हमको किस बात की चिंता? जब परमात्मा हमारे माता-पिता हैं, तो हमें चिंता करने की क्या जरूरत है? मैंने चिंता उसी को दे दी, जिसने जल में उत्पन्न जीव-जन्तुओं के भोजन की व्यवस्था कर रखी है, वह मेरी भी चिंता कर लेगा। जो सारी सृष्टि की देखभाल कर रहा है, क्या वह एक मनुष्य की देखभाल नहीं करेगा? हम क्यों चिंता करें? यह चिंता करने का काम हमारा नहीं, जिसका है, वह करे। हम ऐसा बोलते तो हैं कि त्वमेव माता च पिता त्वमेव, लेकिन दिल में ऐसा भाव पक्का भी होना चाहिए कि ईश्वर ही मेरे माता-पिता हैं। प्रह्लाद से उन...