समस्तीपुर, फरवरी 20 -- आज के दौर में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती है डिग्री होने के बावजूद रोजगार न मिल पाना। उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप व्यावहारिक कौशल और अनुभव की कमी के कारण बड़ी संख्या में शिक्षित युवा बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। कंपनियां अब केवल शैक्षणिक डिग्री नहीं, बल्कि "रेडी-टू-वर्क" कौशल और व्यावहारिक अनुभव वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जबकि शिक्षा व्यवस्था में इस दिशा में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ है। छात्र प्रेम कुमार, नीरज कुमार और अमन सिंह का कहना है कि देश के अधिकांश डिग्री पाठ्यक्रम उद्योग की मांगों के अनुरूप प्रशिक्षण नहीं देते। परिणामस्वरूप, इंजीनियरिंग, बीकॉम, बीए, एमए जैसी डिग्रियां हासिल करने के बाद भी युवा इंटर्नशिप, प्रोजेक्ट अनुभव और सॉफ्ट स्किल्स से वंचित रह जाते हैं। आईटी, ऑटोमोबाइल, रिटेल और...
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