विधि संवाददाता, जनवरी 31 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में लगातार हो रहे पुलिस एनकाउंटर को लेकर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सिर्फ प्रमोशन और शोहरत के लिए मुठभेड़ का सहारा ले रही है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है क्योंकि दंड देने का अधिकार केवल अदालत के पास है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने मिर्जापुर के राजू उर्फ राजकुमार और दो अन्य की जमानत अर्जियों पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव से जवाब तलब किया कि क्या किसी पुलिस अधिकारी को आरोपियों के पैरों में गोली मारने का कोई लिखित या मौखिक आदेश दिया गया है। अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस अक्सर मामूली मामलों में भी मुठभेड़ का दिखावा करते हुए अंधाधुंध फायरिंग कर देती है, जबकि इन मुठभेड़ों में किसी अधिकारी को चोट नहीं लगी। इससे आग्नेयास्त्र के उपयोग...
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