मुजफ्फरपुर, दिसम्बर 17 -- मुजफ्फरपुर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। सिकंदरपुर गोशाला में श्रीरामलीला के छठे दिन बुधवार को महाराजा दशरथ स्वर्गगमन का मंचन हुआ। प्रभु राम-केवट मिलन एवं वनवास में भरत मिलाप का मंचन देख दर्शक भावुक हो उठे। वनवास यात्रा के दौरान श्रीराम, सीता और लक्ष्मण गंगा नदी के किनारे पहुंचते हैं। उन्हें नाव की आवश्यकता होती है। वहां पर पहले से नाव लेकर केवट रहता है, लेकिन श्रीराम को नाव में बिठाने से मना कर देता है। उसे डर था कि श्रीराम के पैरों के स्पर्श से उसकी लकड़ी की नाव भी किसी नारी में बदल जाएगी, जिससे उसका रोजी रोटी खत्म हो जाएगा। केवट की असली इच्छा श्रीराम के चरणों को धोकर पवित्र करना था, जो उसके लिए सबसे बड़ा सौभाग्य था। श्रीराम केवट की भक्ति और निस्वार्थ सेवाभाव से प्रसन्न होते हैं और उसे अपने चरणों को धोने की अनुमति दे...