अलीगढ़, नवम्बर 28 -- अलीगढ़। शताब्दी नगर स्थित शिव मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा चल रही है। शुक्रवार को हुई कथा में स्वामी सरूपानंद महाराज ने भागवत पुराण के एकादश स्कंध पर व्याख्यान दिया। बताया कि माया शब्द का प्रयोग अनेक अर्थों में होता है। लोग जब किसी चकित कर देने वाली घटना को देखते हैं तो उसे ईश्वर की माया नाम दे देते हैं। संसार माया के तीन गुणों से युक्त है, तमोगुण, रजोगुण और सतोगुण और इन तीन गुणों का जीवधारियों के लिए बहुत महत्व होता है। माया के प्रथम अक्षर मा का अर्थ नहीं है एवं या का अर्थ जो होता है अर्थात जो नहीं है, फिर भी महसूस कराता है, वही माया है। यही माया सारे संसार को भ्रमित किए हुए है। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि दैवी एषा गुणमई मम माया दूरत्या यानी मेरी यह माया गुणमई है और व्यक्ति गुणों से गुणों का तादात्म्य कर लेत...