विधि संवाददाता, अप्रैल 28 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि तदर्थवाद को समाप्त करने के लिए 25 जनवरी 1999 के बाद अध्यापकों की नियुक्ति का अधिकार माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड को दे दिया गया और प्रबंध समिति का अल्पकालिक रिक्त पद पर नियुक्ति का अधिकार समाप्त कर दिया गया है। साथ ही तदर्थ नियुक्ति के नियमितीकरण का कोई प्रावधान नहीं किया गया है इसलिए प्रबंध समिति द्वारा नियुक्त अध्यापक को वेतन भुगतान करने का राज्य सरकार को निर्देश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इंटरमीडिएट शिक्षा कानून की धारा 16(2) के अनुसार अधिनियम के प्रावधानों के उल्लघंन कर की गई कोई भी नियुक्ति शून्य होगी। यह भी पढ़ें- शिक्षकों की अनुकंपा नियुक्ति का शासनादेश रद्द, हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र एवं न्यायमूर्ति पीक...
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