नई दिल्ली, दिसम्बर 2 -- राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की खबरें रोजाना नई सुर्खियां बटोर रही हैं। जिस समय दिल्ली उच्च न्यायालय एक हत्यारोपी को वायु प्रदूषण के आधार पर 15 दिनों के लिए जमानत देने का ऐतिहासिक फैसला कर रहा था, लगभग उसी समय सुप्रीम कोर्ट की हर महीने प्रदूषण पर दो बार सुनवाई करने संबंधी टिप्पणी भी सामने आई। इन दोनों बातों के गहरे निहितार्थ हैं। दिल्ली उच्च न्यायालय का जमानत देने का निर्णय जहां एक कैदी के जीने के अधिकार का संरक्षण करता है, तो वहीं प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत व न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की आला अदालत की पीठ ने उचित ही कहा है कि वायु प्रदूषण की समस्या को अब सिर्फ सर्दियों की मुसीबत के रूप में नहीं देखा जा सकता। यह एक गंभीर समस्या बन चुका है और अब फौरी निदान के बजाय इसका दीर्घकालिक समाधान ढूंढ़ना अनिवार्य हो गया ह...