बिजनौर, जनवरी 3 -- दृष्टि बाधिता के बावजूद भी ब्रेल विधि से शिक्षा ग्रहण कर दिव्यांग भी अपने सपनों को उड़ान दे सकते हैं। यह सिद्ध कर दिखाया बाल्यकाल मे ही अकस्मात नेत्र ज्योति खो देने वाले क्षेत्र के दो दृष्टि दिव्यांगों ने ब्रेल विधि से शिक्षा की मुख्य धारा से जुड़कर ग्रामीण बैंक में लिपिक बनकर व सरकारी प्राथमिक स्कूल में शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं देकर एक मिसाल कायम की है। क्षेत्र के गांव हीमपुर प्रथ्या निवासी नेतराम सैनी के घर मे 20 जून 1996 को जन्मा पुत्र जागेश की पांच वर्ष की आयु में अकस्मात आंखों की रोशनी चली गई थी। दृष्टि दिव्यांगता के बाद जागेश कुमार का उसके पिता ने 2004 में भारतीय नेत्रहीन विद्यालय सहारनपुर में ब्रेल विद्यालय में प्रवेश कराया। जहां से 2012 में जागेश ने कक्षा आठ उत्तीर्ण करने के बाद उत्तराखंड हरिद्वार के अजरानंद ...
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