कटिहार, मई 5 -- कटिहार। जलवायु परिवर्तन और रासायनिक खेती के बढ़ते खर्च ने कटिहार के किसानों को अब वैकल्पिक फसलों की ओर सोचने को मजबूर कर दिया है। जिले के बारसोई, आजमनगर, कुरसेला एवं कोढ़ा प्रखंड के कुछ किसान अब धान और मक्का की पारंपरिक खेती से हटकर मोटे अनाज, खासकर ज्वार और बाजरा की ओर लौट रहे हैं। ये फसलें न सिर्फ पोषण से भरपूर हैं, बल्कि खेती में लागत भी कम आती है। कटिहार के आजमनगर प्रखंड के किसान रामप्रवेश यादव बताते हैं कि बाजरे की खेती में न धान जितना पानी चाहिए, न खाद की जरूरत होती है। एक एकड़ में लागत भी आधी आती है और बाजार में अच्छा दाम मिल रहा है। कटिहार के खेतों में यह बदलाव धीमे-धीमे शुरू हो चुका है। जहां कभी सिर्फ धान और मक्का की बात होती थी, अब पोषण और मुनाफे की नई राह पर मोटे अनाज किसानों की उम्मीद बन रहे हैं। ज्वार बाजरा की...
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