विधि संवाददाता, दिसम्बर 17 -- पटना हाईकोर्ट ने पोक्सो कानून के तहत उम्रकैद की सजा पाए पवन कुमार मंडल को बरी कर दिया है। ट्रायल कोर्ट के फैसला को निरस्त करते हुए कोर्ट ने उसे जेल से रिहा करने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति डॉ. अंशुमान की खंडपीठ ने पोक्सो जैसे गंभीर कानून में अभियोजन के दायित्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ मेडिकल करा देने से पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम होने का कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है। मेडिकल में एक दो साल का अंतर होता हैं। ऐसे में मेडिकल के साथ उम्र निर्धारण से जुड़े प्राथमिक दस्तावेज जैसे स्कूल रिकॉर्ड, मैट्रिक प्रमाण पत्र साक्ष्य के रूप में पेश किया जाना चाहिए। मेडिकल टेस्ट के आधार पर पीड़िता को नाबालिग मानना सुरक्षित नहीं है। कोर्ट ने पाया कि आरोपी और पीड़िता के बीच लंबे समय से प्रेम संबंध...
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