लातेहार, जनवरी 9 -- लातेहार, संवाददाता। झारखंड सरकार द्वारा अधिसूचित नई पेसा नियमावली को लेकर ग्रामीण इलाकों में आक्रोश और निराशा दोनों बढ़ने लगी है। नियमावली के अनुसार अब ग्राम सभा की किसी भी बैठक, निर्णय और प्रस्ताव को तब तक वैध नहीं माना जाएगा, जब तक उस पर पंचायत सचिव के हस्ताक्षर और सरकारी मोहर न हो। यही प्रावधान पूरे विवाद की जड़ बन गया है। भाजपा नेता, जिला सांसद प्रतिनिधि और ग्राम प्रधान कन्हाई सिंह ने इसे ग्राम स्वशासन पर सीधा हमला बताते हुए कहा कि सरकार ने ग्राम सभा को व्यवहारिक रूप से अफसरों के अधीन बंधक बना दिया है। कन्हाई सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि पंचायत सचिव न ग्राम सभा का सदस्य है, ना ही गांव का प्रतिनिधि। फिर वही अंतिम मुहर लगाए, यह किस तरह का पेसा कानून है? सरकार ने गांव के अधिकार छीनकर फाइलों में कैद कर दिया है। सरकार...
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