पटना, दिसम्बर 12 -- यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर यानी मूत्रमार्ग का संकुचन ऐसी समस्या है जिसका देर से पहचान होने पर किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकती है। समय पर जांच और आधुनिक तकनीकों से इसका उपचार बेहद सफल है। वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट एवं सत्यदेव सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. कुमार राजेश रंजन ने यह जानकारी दी। यूरिथ्रल स्ट्रिक्चर ज्यादातर पुराने इंफेक्शन, दुर्घटनाओं, प्रोस्टेट सर्जरी, बार-बार कैथेटर लगाने या किसी चोट के कारण होता है। मूत्रमार्ग संकुचित होने से मरीज को पेशाब करने में रुकावट, कमजोर फ्लो, बार-बार यूटीआई, निचले पेट में दर्द और कई बार पेशाब बिल्कुल रुक जाने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। डॉ. राजेश ने कहा शुरुआती चरण में साधारण जांच यूरेथ्रोग्राम, यूरोफ्लोमेट्री और एंडोस्कोपी के जरिए इसे आसानी से पहचाना जा सकता है।
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