नई दिल्ली, दिसम्बर 10 -- पूर्व न्यायाधीशों के एक समूह ने रोहिंग्या प्रवासियों से संबंधित सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की हाल की टिप्पणियों के मद्देनजर उन्हें निशाना बनाकर चलाई जा रही एक 'सोची-समझी मुहिम' की बुधवार को कड़ी आलोचना की। सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालयों के 44 सेवानिवृत्त जज ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने या मुख्य न्यायाधीश पर राजनीतिक मंशा थोपने के प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे संवैधानिक संस्थानों में जनता का विश्वास और अदालत की स्वतंत्रता कमजोर हो रही है। पूर्व न्यायाधीशों ने 'सुप्रीम कोर्ट का अनादर अस्वीकार्य है' शीर्षक वाले एक बयान में कहा कि न्यायिक कार्यवाही केवल निष्पक्ष और तर्कसंगत आलोचना के अधीन होनी चाहिए। पूर्व न्यायाधीशों ने कहा कि सीजेआई पर सबसे बुनियादी कानूनी सवाल पूछने के लिए निशाना साधा...