लखीसराय, नवम्बर 18 -- कजरा। आचार्य संजय पाठक ने बताया कि वैदिक पंचांग के अनुसार गुरुवार 20 नवंबर को मार्गशीर्ष अमावस्या है। सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का खास महत्व है। इस शुभ अवसर पर बड़ी संख्या में साधक गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके बाद गंगाजल से देवों के देव महादेव का अभिषेक करते हैं और भक्ति भाव से पूजा करते हैं। इसके साथ ही पितरों का श्राद्ध, तर्पण एवं पिंडदान किया जाता है। गरूर पुराण में निहित है कि अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं पितरों की कृपा बरसती है।
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