नई दिल्ली, नवम्बर 4 -- देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाले पुष्कर स्नान की महत्ता इससे ही सिद्ध होती है कि इसके बिना चारों धाम की यात्रा का पुण्य फल भी अधूरा रहता है। पूरे वर्ष में इन पांच दिनों में पुष्कर तीर्थ का विशेष महत्व है। देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक चलने वाले पुष्कर स्नान के बारे में मान्यता है कि इसके बिना चारों धाम की यात्रा का पुण्य फल भी अधूरा रहता है। पूरे वर्ष में इन पांच दिनों में पुष्कर तीर्थ का विशेष महत्व है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन यह महत्व और भी बढ़ जाता है। इन पांच दिनों को भीष्म पंचक के नाम से भी जाना जाता है। पुष्कर से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। एक बार सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी ने पृथ्वी लोक पर यज्ञ करने का निश्चय किया। उस समय पृथ्वी पर वज्रनाभ नाम के असुर का आतंक चारों ओर फैला हुआ था। वह बच्चो...
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