जोधपुर, जनवरी 21 -- राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस द्वारा अपनाई जा रही उस परंपरा की निंदा की है, जिसमें गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को थाने के बाहर बैठाकर मीडिया के सामने उनकी परेड कराई जाती है, साथ ही उनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दी जाती हैं। कोर्ट ने कहा कि किसी भी मामले में व्यक्ति के आरोपी होने व गिरफ्तार होने से वह अपराधी सिद्ध नहीं हो जाता। अदालत ने आरोपियों को इस तरह पेश करने को उनका सार्वजनिक अपमान बताया और इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले सम्मानपूर्वक और गरिमा पूर्ण जीवन जीने के अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया।'24 घंटे में सोशल मीडिया से हटाएं फोटोज' यह बात जस्टिस फरजंद अली की एकल पीठ ने 10 याचिकाकर्ताओं की उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कही, जिनमें पुलिस द्वारा लोगों को परेड में शामिल करने और...
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