नई दिल्ली, सितम्बर 10 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा है कि कड़े कानूनों के बावजूद कार्यस्थलों पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है। पुरुषों की मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया है। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की पीठ ने शेक्सपियर की पंक्तियों का हवाला देते हुए कहा कि पहले मेरा डर, फिर मेरा शिष्टाचार, अंत में मेरा भाषण। मेरा डर आपकी नाराजगी है, मेरा शिष्टाचार मेरा कर्तव्य है और मेरा भाषण आपसे क्षमा याचना है। आदेश के अनुसार ये पंक्तियां एक महिला के जीवन का सटीक सार पेश करती है। चाहे वह घर हो या कार्यालय। इसलिए पीठ ने समन के आदेश के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के एक सरकारी अधिकारी आसिफ हामिद खान द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। शिकायत में दिसंबर 2014 में यौन उत्पीड़न, आपराधिक धमकी व उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। पीठ ने कहा कि...
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