नई दिल्ली, दिसम्बर 1 -- मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआईआर पर सियासत तेज होती जा रही है। संसद सत्र की शुरुआत के साथ ही एसआईआर पर बहस कराने की मांग भी तेज हो गई है। एसआईआर से सबसे बड़ी शिकायत इसके समय को लेकर है। आरोप है कि बीएलओ को इस काम के लिए काफी कम समय दिया गया है। ऐसे में, यह संतोष की बात है कि चुनाव आयोग ने पुनरीक्षण की सीमा अब 4 दिसंबर से बढ़ाकर 11 दिसंबर कर दी है। बीएलओ को इससे राहत मिलेगी। इसके अलावा चुनाव आयोग का बीएलओ को दोगुना आर्थिक लाभ देने का फैसला भी सराहनीय है। आमतौर पर बीएलओ का काम सरकारी शिक्षक करते हैं और आर्थिक लाभ बढ़ने से उनका उत्साह बढ़ेगा। जरूरी है कि बीएलओ को अनावश्यक दबाव से बचाया जाए। वैसे भी ये शिक्षक शांत भाव से नौकरी करते हैं और उनके पारंपरिक काम में 'टारगेट' जैसे शब्द उतनी मजबूती से नहीं हैं। अध...