नई दिल्ली, फरवरी 1 -- नई दिल्ली, प्र.सं.। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल यह आरोप लगाना कि दोपहिया वाहन पर पीछे बैठा यात्री शराब के नशे में था, उसे हादसे में योगदान देने वाली लापरवाही ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि जब तक कथित नशे और दुर्घटना के बीच स्पष्ट कारण-संबंध स्थापित न हो, तब तक मुआवजे में कटौती उचित नहीं मानी जा सकती। न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने यह टिप्पणी एक बीमा कंपनी की अपील पर सुनवाई के दौरान की। कंपनी ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पीछे बैठे यात्री को मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। बीमा कंपनी ने मेडिको-लीगल सर्टिफिकेट (एमएलसी) का हवाला देते हुए दलील दी कि घायल व्यक्ति अस्पताल पहुंचने के समय शराब के नशे में था। इसी आधार पर अ...