लखनऊ, फरवरी 24 -- बेटे मानवेंद्र सिंह के निधन के बाद पिता सुरेंद्र पाल (एसपी) सिंह राजावत की आंखों में ऐसा दर्द है, जिसे शब्दों में बांध पाना मुश्किल है। कांपती आवाज में उन्होंने कहा, मेरी बुढ़ापे की लाठी टूट गई.। बेटा तो चला ही गया, उसके साथ मेरा पौत्र भी अपराधी बन गया। उसकी जिंदगी भी तबाह हो गई। 30 नवंबर 2016 को ललितपुर की एक चौकी के इंचार्ज पद से सेवानिवृत्त हुए सुरेंद्र पाल सिंह ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उन्हें अपने जवान बेटे को यूं विदा करना पड़ेगा। वे बार-बार यही कहते रहे, मानवेंद्र मुझे हमेशा कहता था, पापा! खेत बंटाई पर दे दो और यहीं आकर हमारे साथ रहो। अब वही घर, जहां बेटे की हंसी गूंजती थी, मातम में डूबा है। सुरेंद्र पाल सिंह की आंखें दरवाजे पर ठहर जाती हैं। मानो अभी मानवेंद्र आवाज देता हुआ अंदर आ जाएगा।
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