नवादा, फरवरी 9 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जलवायु परिवर्तन और अनिश्चित मानसून ने जहां मगध क्षेत्र की खेती-किसानी को संकट में डाल रखा है, वहीं नवादा जिले के कुछ प्रगतिशील किसानों ने एक पुरानी राह पकड़कर नई कामयाबी की इबारत लिखनी शुरू कर दी है। धान और गेहूं की पारंपरिक खेती, जिसमें पानी की भारी खपत होती है, उसके विकल्पस्वरूप अब जिले के किसान श्री अन्न यानी मिलेट्स अर्थात मोटा अनाज की ओर लौट पड़ हैं। रागी यानी मड़ुआ समेत ज्वार, बाजरा और चीना जैसी फसलें अब केवल गरीबों का भोजन नहीं, बल्कि नवादा के सुखाड़ प्रभावित इलाकों के लिए पीला सोना साबित हो रही हैं। नवादा जिला आरम्भ से कम वर्षा और गिरते भू-जल स्तर की समस्या से जूझता रहा है। यदि जल खपत के तकनीकी आंकड़ों पर गौर करें तो धान की खेती के लिए प्रति किलोग्राम चावल उत्पादन में लगभग 3,000 से 5,0...