आगरा, जनवरी 25 -- दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन साध्वी भाग्यश्री भारती ने गुरु की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा गुरु न मिले जो भृकुटी के मध्य स्थित तृतीय नेत्र खोल दे, तब तक गुरु की खोज करनी चाहिए। साध्वी ने कहा कि संसार में बहुत से लोग भगवा वस्त्र पहनकर स्वयं को गुरु कहते हैं, लेकिन केवल वेश से कोई संत नहीं बनता। रावण और कालनेमि ने भी भगवा धारण किया था, पर वे संत नहीं थे। ऐसे लोग संत के रूप में बहरूपिये और ठग होते हैं। उन्होंने कहा- "पानी पियो छानकर और गुरु करो जानकर।" यदि जीवन को सफल बनाना है तो पूर्ण सतगुरु को प्राप्त करें। आज गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज ब्रह्मज्ञान देकर लोगों का जीवन सफल बना रहे हैं। आप सभी उस ब्रह्मज्ञान को प्राप्त कर अपना जीवन सार्थक बना सकते हैं।

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