चित्रकूट, मई 5 -- चित्रकूट, संवाददाता। घनघोर जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच एमपी सीमा से सटे पाठा क्षेत्र के गांवों में करीब चार दशक तक दुर्दांत डकैतों का खौफ लोगों के बीच रहा है। दुर्दांतों की बंदूकों से निकलने वाली गोलियों की तड़तड़ाहट पाठा के गांवों में गूंजती रही है। इसी पाठा में दुर्दांतों का सफाया होने के साथ ही अब यहां की बेटियां पुलिस में भर्ती होकर बंदूक थामने के लिए आगे आ चुकी है। एमपी सीमा से सटा पाठा क्षेत्र चार दशक तक दुर्दांतों का मुफीद ठिकाना रहा है। उस दौरान डकैतों के खिलाफ मुंह खोलने वाले लोगों को अपनी जिंदगी ही गंवानी पड़ी है। इन डकैतों की वजह से ही पाठा हर क्षेत्र में पीछे चला गया। लेकिन अब दुर्दांतों का सफाया होने के साथ ही पाठा की बेटियां भी बंदूक थामकर अपराधियों से लोहा लेने को आगे आ रही है। मानिकपुर ब्लाक क्षेत्र की ...
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