वीरेंद्र सिंह, दिसम्बर 31 -- कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और मेहनत में ईमानदारी हो, तो मिट्टी सोना उगलने लगती है। इस कहावत को सच कर दिखाया है बाराबंकी के सतीनपुरवा गांव के रहने वाले युवा किसान मोहम्मद सलमान ने। कभी मुफलिसी के बीच परिवार का पेट पालने के लिए दूसरों की खेतों में पसीना बहाने वाले सलमान आज खुद 25 से 30 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। प्रगतिशील किसान बन चुके सलमान का सालाना टर्नओवर 70 लाख तक पहुंच गया है। सलमान के परिवार में 14 सदस्य हैं। विरासत में उन्हें दो एकड़ खेत मिले थे। पारंपरिक तरीके से धान और गेहूं की खेती से मुश्किल से घर का खर्च, दवाइयां और रोजमर्रा की जरूरतें पूरी हो पाती थीं। हालात इतने तंग थे कि पैसों के लिए सलमान को दूसरों के खेतों में मजदूरी तक करनी पड़ती थी। लेकिन, उनके मन में कुछ बड़ा करने की तड़प हमेशा बरकरार...