कानपुर, फरवरी 21 -- रमजान के दौरान जकात, फितरा, फिदया (दान के प्रकार) से जुड़े सवालों के जवाब उलमा की रमजान हेल्पलाइन दे रही हैं। कुल हिन्द इस्लामिक इल्मी अकादमी की अल-शरिया हेल्पलाइन ने स्पष्ट किया कि अगर कोई गुजरे साल सोने पर जकात देना भूल गया है तो उसे इस साल पुरानी दर पर नहीं बल्कि मौजूदा दरों पर जकात निकालनी होगी। नसीमा बेगम ने सवाल पूछा था कि मैंने पिछले सालों में सोने की ज़कात अदा नहीं की और अब देना चाहती हूं, तो क्या पिछले सालों के सोने का रेट लगेगा या आज के सोने का रेट। जवाब दिया गया कि पिछले सालों की ज़कात सोने के मौजूदा रेट के हिसाब से अदा की जाएगी। इसी तरह से रईस अहमद के सवाल पर उलमा के पैनल ने कहा कि रोज़े की हालत में दरिया, नहर या स्वीमिंग पूल में ग़ोता (डुबकी) लगाने से रोज़ा नहीं टूटता बशर्ते कि पानी मुंह या नाक के रास्ते से हलक़...