लखीसराय, जनवरी 11 -- कजरा,एक संवाददाता। पशुपालन का व्यवसाय अब काफी हद तक दुग्ध उत्पादन तक सीमित होकर रह गया है। कारण खेती-किसानी में बैलों के बजाय ट्रैक्टर का इस्तेमाल हो रहा है। चमड़ा कारोबार भी इस जिले में ठप है। पशुपालन विभाग के सेवानिवृत्त चिकित्सकों और जानकारों का मानना है कि पूर्व की भांति पशु मेले और बाजार लगने से कई लोगों को आसानी से रोजगार मुहैया हो सकता है, लेकिन इसके लिए अब सरकार को नियमों में कुछ राहत प्रदान करनी होगी। गोवंशीय पशुओं की हत्या पर सरकार के सख्त कानून से अब समाज के कई लोग गोपालन करने से कतरा रहे हैं। वहीं, भैंस का अधिक मूल्य होने से कमजोर व गरीब किसान बाजारों से खरीद नहीं पा रहे हैं। दूसरी तरफ दुग्ध उत्पादन भी कम हुआ है। चारे की समस्या के चलते किसान भी अब बहुत कम जानवर पालते हैं। व्यावसायिक दृष्टि से डेयरी का व्यवस...
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