सहरसा, जनवरी 8 -- सहरसा, हिन्दुस्तान टीम। नदियों पर संकट गहराने का असर पशुओ पर भी पड़ा है। अधिकांश नदियों में अभी के समय में इतना पानी नहीं रहता कि पशु उसमें नहला सके या उसकी प्यास बुझा सके। वह दौर अब लगभग खत्म हो गया जब छोटी-छोटी नदियों में नहलाते पशु दिख जाते थे। पानी पीकर प्यास बुझाते पशुओं की झुंड दिखती थी। नदियों के वजूद पर संकट मंडराने से पशुधन जैसे परंपरागत पेशा छोड़ने को पशुपालक मजबूर हैं। अब तो पशुओं को मोटरपंप से नहलाना पड़ता: सत्तरकटैया से एक संवाददाता के अनुसार पशुपालक अब पशुओं के लिए पानी व्यवस्था को मोटरपंप पर निर्भर हैं। निजी व्यवस्था कर पानी पिलाने और नहलाने पर जेब ढीली अलग करनी पड़ती है। दरअसल, इलाके से गुजरनेवाली दो नदियों सहित नहरों में पानी की हो रही कमी से पशुपालकों को ना पशुओं को नहलाने ना ही पिलाने के लिए पानी मिल रहा ह...
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