नवादा, अगस्त 26 -- नवादा। राजेश मंझवेकर वर्तमान में नवादा जिले के बंसफोड़ समाज काफी बुरे हालात से गुजर रहे हैं। बांस तराश सके तो घर-संसार सज-बस जाता है, अन्यथा रोटियों के भी लाले पड़ जाते हैं। बांस से बनने वाले उत्पाद घरेलू सामग्री को समुचित तरीके से रखने और सहेजने के अलावा ड्राइंग रूम को सजाने-संवारने की वस्तु है, लेकिन हुनरमंदों के लिए बांस रोटी-रोजी का साधन है। मुश्किल यह है कि इन दिनो रोजी-रोटी पर ही आफत आ गयी है। नए जमाने की चकाचौंध में बांस के उत्पादों के कद्रदान भी घट गए हैं और इससे बांस को चीर-छीलकर उसे अलग-अलग रूपों में ढालने में माहिर हनुरमंद लोग भी कम होते जा रहे हैं। बांस से जुड़ी सामग्री तैयार करने का काम बंसफोड़ समाज परंपरागत रूप से करता आ रहा है, लेकिन कई अन्य वर्ग के लोग भी इससे जुड़े हैं। मांग के अलावा बांस की उपलब्धता की...
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