बगहा, दिसम्बर 4 -- जलवायु परिवर्तन से बाढ़ और सुखाड़ का खतरा दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। बे मौसम बारिश से खेती चौपट हो रही है। बे मौसम बारिश, गर्मी और ठंडी बढ़ने से जनजीवन प्रभावित हो रहा है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग के खतरे से निपटने के लिए पेड़ों के अंधाधुंध कटाई पर रोक लगानी होगी। साथ ही पराली प्रबंधन की जरूरत है। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाना होगा। पराली जलाने से पर्यावरण को अधिक नुकसान पहुंचता है। इसके धुएं से वायु प्रदूषण होता है। साथ ही मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी खत्म हो जाती है। पर्यावरण प्रदूषण से बारिश का चक्र भी प्रभावित हुआ है। खेती के समय बारिश नहीं हो रही है। बीते पांच-छह वर्षों से जिले में प्रदूषण के कारण ही बारिश अनियमित हो रही है। कभी अत्यधिक तो कभी बिल्कुल कम बारिश हो रही है। इससे सबसे ज्यादा नुकसान किसानों को हुआ है। कृ...